उद्घाटन, वैश्विक अनुवाद अधिकार सूची 2017 का विमोचन एवं प्रधान उद्घोष: जयपुर बुक-मार्क  

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महामहिम हरिंदर सिद्धू ( ऑस्ट्रलियाई दूत), नमिता गोखले, संजॉय के. रॉय, नीता गुप्ता और रोबर्टो कलास्सो

 

वृषाली जैन, अधिकृत ज़ी लिटरेचर फेस्टिवल ब्लॉगर

 

किताबों की अपनी दुनिया है| इस दुनिया का आगाज़ और अंजाम भले ही शब्द हों लेकिन, शब्द के जन्म लेने से और किताब की शक्ल लेने तक सौइयों ऐसे पड़ाव हैं जो एक कहानी को पार करने पड़ते हैं| जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आगाज़ इसी किताबों की दुनिया को समझने से हुआ| जयपुर बुक मार्क, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का वो हिस्सा है जिसमें दुनियाभर के प्रकाशक, लेखक, संपादक, अनुवादक और पाठक शिरकत करते हैं और किताबों की दुनिया में हो रहे नए-नए आयामों पर बात करते हैं|

मृगया बैंड की आवाज़, सुकृति सेन ने मंगल गान से बुकमार्क की शुरुआत की| सुबह के हलके ठन्डे माहौल में उनकी आवाज़ किसी नर्म शाल सी श्रोताओं को खुद में लपेटती चली गयी|

आगे बढ़ते हुए फेस्टिवल डायरेक्टर नमिता गोखले ने कहा कि ऐसा महसूस होता है जैसे जयपुर बुकमार्क की घर वापसी हुई है| चार साल बाद वापिस जयपुर बुक मार्क वापिस डिग्गी पैलेस के दरबार हॉल लौटा है| उन्होंने दरबार हॉल को उस शक्ति पीठ की तरह बताया जहाँ से प्रकाशन की दुनिया के सभी भागीदार नयी सोच, नए विचारों और नयी कल्पनाओं की उड़ान भरते हैं|

एक ऐसा देश जिसमें 24 अधिकृत भाषाएँ हैं और हर भाषा का एक गाढ़ा साहित्य है, अनुवादकों की भूमिका बहुत अहम हो जाती है| इसी कड़ी में वाणी फाउंडेशन के ट्रांसलेटर ऑफ़ द इयर अवार्ड का ज़िक्र करते हुए नमिता जी ने कहा कि अनुवादकों को पहचान देना बहुत ज़रूरी है|

नमिता जी की ही बात को आगे बढाते हुए संजॉय के. रॉय का कहना था, “अनुवादक वो कड़ी है जो भाषाओँ को आपस में जोड़ता है| दो एकदम अलग भाषाओँ का इतिहास, उनकी संस्कृति, उनकी कहानियां जब तक आपस में बांटी न जायें, हम सीखने के कर्म के कहीं बहुत पीछे छूट जायेंगे|” साहित्य दो अनजान दिलों को जोड़ने वाली वो कड़ी है जो जाति, राष्ट्र, रंग किसी का भेद नहीं जानती|

और इसी एक धागे से बंधीं, खिंची चली आयीं थीं ऑस्ट्रलियाई राजदूत हरिंदर सिद्धू| हरिंदर सिद्धू ने सरहदों के फासले पाटते हुए न ही सिर्फ अंग्रेजी में बल्कि हिंदी, तमिल, पंजाबी और कई अन्य भारितीय भाषाओँ में सभा का अभिवादन किया|

उन्होंने कहा कि “हिन्दुस्तान एक कमाल का देश है| यहाँ हर कोई कुछ पढ़ रहा होता है, हर किसी के पास अपने पढ़े पर कहने के लिए कुछ है|”

नीलसन बुक मार्किट रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत अंग्रेजी किताबों का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है| ज़ी लिटरेचर फेस्टिवल से ऑस्ट्रेलिया की सहभागिता उतनी ही पुरानी है जितना कि खुद ये लिटरेचर फेस्टिवल| हरिंदर का कहना था कि भारतीय और ऑस्ट्रलियाई लेखक एक लम्बे अरसे से एक दूसरे के देशों में लोकप्रिय हैं|

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना है कि राष्ट्रपति होने का अकेलापन उन्होंने अपनी किताबों से ही साझा किया है| इसी उदाहरण को लेते हुए हरिंदर का कहना था कि किसी भी सभ्यता को बेहतर जानने के लिए उसका साहित्य पढना बहुत ज़रूरी है| वो इसीलिए चाहती हैं कि भारतीय ऑस्ट्रेलियाई साहित्य के और करीब आयें|

दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियाँ तब करीब आयेंगी जब न ही केवल उनका साहित्य अनुवादित हो, बल्कि प्रकाशित भी हो| प्रकाशन जगत के जाने माने नाम और अपने आप में ही एक संस्था माने जाने वाले रोबर्टो कलास्सो का कहना था कि प्रकाशन जगत पिछले पचास साल में अपनी धुरी पर लगभग उल्टा घूम गया है| आज एक प्रकाशक अपनी हर किताब को उसी नज़र से dekhta है जिस निगाह से एक लेखक अपनी किताब को देखता है| आज के समय में ये बहुत ज़रूरी है कि प्रकाशक वो केंद्र-बिंदु बनें जहाँ से हर तरह का साहित्य एक जैसी शक्ति पाए| प्रकाशक वो धागा है जो मनका-मनका करके दुनिया भर के साहित्य को एक सूत्र में बांधे|

इसी क्रम में ऑस्ट्रलियाई राजदूत हरिंदर सिद्धू, डिग्गी पैलेस की महारानी ज्योतिका डिग्गी, फेस्टिवल डायरेक्टर नमिता गोखले और संजॉय के. रॉय, वाणी प्रकाशन की अदिति महेश्वरी गोयल, ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर से प्रीती पॉल ने मिलकर वैश्विक अनुवाद अधिकार सूची 2017 का विमोचन किया जिसमें ५ पूर्वोत्तर भारतीय  और नेपाली साहित्य की किताबों को अनुवाद के लिए खोला गया|

Photo Credits: Chetan Singh Gill

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