आज़ादी मेरा ब्रांड: वॉकिंग फ्री

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अनुराधा बेनीवाल संग संवाद स्वानंद किरकिरे  

 

उर्मिला गुप्ता, ऑफिशियल ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ब्लॉगर

 

यूं तो इतिहास में अक्सर आजादी को हासिल करने के लिए आंदोलन हुए हैं, बड़े-बड़े संग्राम हुए हैं, लेकिन गहराई से देखा जाए तो आज़ादी इन सबसे बढ़कर खुद पर लगाईं सीमाओं, अपनी बंधी हुई सोच से निकलने का एहसास है| आज के बहुत से लेखक, ब्लोगर और वक्ता इसी एहसास को मजबूती दे रहे हैं| अभी हाल ही में कई नामी ब्लोग्स पर मैंने इसके बारे में पढ़ा| देखा जाए तो किसी दूसरे से ज्यादा हम खुद पर पाबंदियां लगाते हैं, इसके कारण परवरिश के साथ-साथ और भी कई चीजें होती हैं| जैसे बचपन से ही हमें बताया जाता है कि अँधेरा होने से पहले घर आ जाओ… हालाँकि ये पूरी तरह गलत नहीं है लेकिन फिर भी ये किसी न किसी रूप में लड़कियों के लिए बाधा तो बनता है| अभी जयपुर साहित्योत्सव में शाम के प्रोग्राम देखने के दौरान बार मेरे मन में बैठी एक आवाज मुझे कभी घड़ी दिखाती है तो कभी बाहर का अँधेरा| मेरा एक मन किसी भी तरह अँधेरा होने से पहले अपने कमरे में पहुँच जाना चाहता है, और एक मन यहीं रहकर ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलना, उन्हें सुनना|

इसी कशमकश को एक ही झटके में झाड़ देती हैं ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल| यूं तो अनुराधा शतरंज की नेशनल चैम्पियन है और पेशे से वो लंदन में शतरंज की कोच| लेकिन दिल से हरियाणा की ये लड़की घुमक्कड़ है| वो बस पूरी दुनिया घूमना चाहती है और हर लड़की से चिल्ला-चिल्लाकर कहती हैं, “लड़कियों निकलो, घर से बाहर निकल दुनिया देखो, देखो कि अभी कितना जानना और सीखना बाकी है…”

तो बस जयपुर का ये सत्र युवा पाठकों की खास पसन्द बनी किताब ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल और ‘बावला मन’ गीत लिखने वाले युवाओं के चहेते गीतकार स्वानंद किरकिरे के नाम रहा| उन्होंने बड़े दिल से घूमने की आज़ादी और बेफिकर, बेपरवाह दुनिया में घूमने को लेकर विचारोत्तेजक बातें कीं।

स्वानंद के स्वर में जहां ठहराव था वहीं अनुराधा जोश से भरी और दुनिया को बदल देने के जज्बे के साथ उपस्थित थीं| जोश और ठहराव का ये संयोजन जबरदस्त था और श्रोताओं को वास्तव में एक अच्छा सत्र सुनने को मिला| इसमें वो बातें हुईं जो जमीनीं थीं, जिनसे हमें रोजमर्रा कि ज़िन्दगी में दो-चार होना पड़ता है – इसमें महिलाओं के शोषण से लेकर उनके सशक्त बनने तक पर चर्चा हुई|

लेकिन बातचीत ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ किताब पर ही केंद्रित थी। यह अनुराधा बेनीवाल की यात्रा-वृत्तान्त की एक विशेष श्रृंखला ‘यायावरी आवारगी’ की पहली किताब है जो राजकमल प्रकाशन के ‘सार्थक’ उपक्रम से प्रकाशित हुई है। लंदन में शतरंज की कोच और बिंदास अकेले घूमने निकल पड़ने वाली अनुराधा बेनीवाल ने दुनिया के कई देशों का दौरा कर अपनी यात्राओं के अनुभवों को इस किताब में समेटा है. अनुराधा ने इस किताब में हरियाणा के अपने गाँव से लेकर एम्सटर्डम के ‘रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट’ तक के बारे में बेबाकी से लिखा है|

यह किताब  राजकमल प्रकाशन के सार्थक उपक्रम से यायावरी आवारगी श्रृंखला में प्रकाशित हुई है।

अनुराधा के बारे एक बात आपको बड़ी शिद्दत से छूती है कि वो न सिर्फ़ अपनी किताब में बेबाक हैं, लेकिन वास्तव में भी वो जिंदगी के प्रति एक ईमानदार इंसान नजर आती है| विदेश में रहने, घूमने के बावजूद वो खरी हरियाणवी हैं, जबकि हम ऐसे समाज में रहते हैं जहां गर कोई इंसान छह महीने के लिए थाईलैंड रहकर आ जाए तो उसकी बोली में एक ‘एक्सेंट’ आ जाता है| 😉

अनुराधा सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं और अक्सर अपने विचार बड़ी मुखरता से व्यक्त करती हैं| पिछले दिनों जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन की जब उन्होंने खुलकर आलोचना की तो वास्तव में उनकी ईमानदार सोच मुखर हुई|

 

Photo Credit: Rajendra Kapoor

 

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