पोएट्री फॉर मासेस: कविता लोगों के लिए

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प्रसून जोशी संग संवाद अनु सिंह चौधरी वृषाली जैन, अधिकृत ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल   “बाबुल मोहे लोहार के घर दे दीजो, जो मोरी जंजीरें पिघलाए, बाबुल मोरे जिया घबराये…” कुछ इन शब्दों पर ख़त्म हुआ था एक गीतकार, कवि, लेखक प्रसून जोशी का कविताओं पर, जन-कविताओं पर आधारित सेशन| मानते हैं, अंत से किसी… Read more »