आईडिएट- फ्रीडम टू ड्रीम: सोचो: सपने देखने की आज़ादी

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प्रसून जोशी संग संवाद पुनीता रॉय प्रायोजक: भास्कर भाषा सीरीज़   वृषाली जैन, अधिकृत ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ब्लॉगर   असल हुनर किसी पेशे, किसी रोक का मोहताज नहीं| सपने बंद कमरों से भी परवाज़ भर लेते हैं| आँखों को अपने कल को देखने के लिए दीवार में खिड़कियाँ नहीं चाहिए| कुछ ऐसी ही बातें… Read more »