परंपरा की जड़ में लोकभाषा

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By- Aditya Narayan, Officially Blogger Jaipur Literature Festival भारत की राजभाषा, आधिकारिक भाषा और लोक भाषा के अंतर्द्वंद एवं अंतरसंबंधों को लेकर आज़ादी के बाद से ही तमाम बहस संसद के अन्दर तथा बाहर होते रहे हैं| संविधान की आठवीं अनुसूची में निहित 22 भाषाओँ के अतिरिक्त अभी भी समय समय पर विभिन्न लोकभाषाओं को… Read more »

बदला ज़माना, बदली कहानी

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By: Devendra Upadhyay, OfficialZEE Jaipur Literature Festival Blogger क्या बदलते समय के साथ कहानियों का स्वरूप भी परिवर्तित हो रहा और ये बदलाव कितना सही है इसी विषय पर अत्यंत रोचक परिचर्चा जयपुर साहित्योत्सव के चौथे दिन दरबार हाल में सम्पन्न हुई जिसमें सुप्रसिद्ध युवा लेखक गौरव सोलंकी तथा सत्य व्यास ने अपने विचार श्रोताओं… Read more »

Bayan: In Testimony

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Chitra Mudgal in conversation with Nand Bhardwaj By Devendra Upadhyay, OfficialZEE Jaipur Literature Festival Blogger We Too पिछले वर्ष #Me Too ने समूचे विश्व को झकझोर कर रख दिया था परंतु हम यहाँ उस विषय की बात नही कर रहे। जिस WeToo की बात मैं कर रहा हूँ वो विषय भी शायद गंभीरता में उतना… Read more »

Un-Well Done Abba

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By Devendra Upadhyay, OfficialZEE Jaipur Literature Festival Blogger श्याम बेनेगल निर्देशित राष्ट्रीय पुस्कार विजेता फिल्म Well Done Abba के अंत में बोमन ईरानी जब अपनी बावड़ी बनाने में सफल हो जाते हैं तो उनकी बेटी की प्रतिक्रिया ही फिल्म का शीर्षक बन जाती है, परन्तु वर्तमान में हमारे देश में जिस तरह से बावड़ियां, कुएँ… Read more »

साहित्य की भूमिका समाज निर्माण में

By- Aditya Narayan, Official blogger Jaipur literature Festival   साहित्य समाज का आईना होता है| प्रेमचंद से लेकर परसाई ने अपनी कलम समाज और राजनीति को सही राह पर लाने का काम किया है|  प्रेमचंद की लेखनी जहाँ आज भी हमारे गाँवों को तथा उसकी परंपरा को समझने का सबसे प्रमाणिक माध्यम है वहीँ भारतीय… Read more »

इतिहास से मिटे अक्षर

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कल के सफ़ेद पन्नो पर लिखे काले अक्षर आज का इतिहास है| कल को जन्मा एक साधारण सा बालक आज इतिहास का एक प्रतापी सम्राट है| कल जिसकी क्रूरता के चर्चे दहशत का पर्याय थे आज उसके योद्धा होने के प्रमाण विलुप्त हो चुके गाँवों और शमशान बन चुके शहरों में है| सदियों से कल… Read more »

जीवन : व्यक्तिगत और सार्वजनिक

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BY Aditya Narayan, Official Blogger Jaipur literature Festival   मानव के विकास क्रम में जिस प्रकार मानव ने आज एक दूसरे के बीच की दूरी को कम किया है इससे विश्व में सूचना के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति सामने आई है| सूचना के क्षेत्र में आये इस सुनामी के बाद जिस प्रकार सूचना… Read more »

गाथा : मानो तो सच, नहीं तो झूठ

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By:- Urmila Gupta, Official blogger at Zee Jaipur Literature Festival   साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता अलका सरावगी का नया उपन्यास ‘एक सच्ची झूठी गाथा’ आते ही चर्चा का विषय बन गया| इक्कीसवीं सदी की यह गाथा एक स्त्री और एक पुरुष के बीच संवाद और आत्मालाप से बुनी गई है। यहाँ सिर्फ सोच की उलझनें… Read more »

Shalom: Indian Jewish Fiction

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Esther David and Sethu in conversation with Malashri Lal By Sonal Sharma, Official ZEE Jaipur Literature Festival Blogger   Stories of lost books, a shipwreck, a rebellious man and a drunk prophet all came together to create an atmosphere of empathy and a sense of belonging in this fascinating session about the rise of Indian… Read more »

मेरी लेखनी भूख की उपज़ है

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यह शीर्षक मेरे मस्तिष्क की उपज़ बिल्कुल भी नही है अपितु यह तो मनोरंजन व्यापारी जी की नक्सलवादी से लेखक तक के अपने सफर को एक पंक्ति मे पिरोने की कोशिश है जो कि आज उन्होने जयपुर साहित्योत्सव में जयपुर बुकमार्क के अंतर्गत आलोचक अरुनाव सिन्हा तथा साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता लेखक हंसदा सौवेंद्रशेखर… Read more »

English Language Publishing: The Indian Market

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Priya Kapoor, Ranjana Sengupta, Ravi Singh and Sugata Ghosh in conversation with Preeti Gill   Aditya Sinha, Official ZEE Jaipur Literature Festival Blogger To describe India’s English language publishing industry as ‘thriving’ would be an understatement. In 2016, it became the second largest in the world, after the United States. As readership in the country… Read more »

Resurgence of Print

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Anantha Padmanabhan, Ian de Toffoli, Manisha Chaudhary and Rick Simonson, moderated by Arpita Das By Sonal Sharma, Official ZEE Jaipur Literature Festival Blogger     Imagine a world without bookshops and libraries, without print, without the physical presence of the written word. Would anyone want to live there? In an invigorating discussion at Jaipur Bookmark,… Read more »