मेरी लेखनी भूख की उपज़ है

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यह शीर्षक मेरे मस्तिष्क की उपज़ बिल्कुल भी नही है अपितु यह तो मनोरंजन व्यापारी जी की नक्सलवादी से लेखक तक के अपने सफर को एक पंक्ति मे पिरोने की कोशिश है जो कि आज उन्होने जयपुर साहित्योत्सव में जयपुर बुकमार्क के अंतर्गत आलोचक अरुनाव सिन्हा तथा साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार विजेता लेखक हंसदा सौवेंद्रशेखर… Read more »