कथा से कॉमिक्स: दृश्यामक कहानी कहने क विकास

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अर्पिता दास, जान्हवी प्रसाद, जेसन क्विन, पंकज थापा और रीना पुरी संग संवाद फ़िलिप ए. लुट्जेनडोर्फ़ वृषाली जैन, अधिकृत ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ब्लॉगर   ‘80 और ‘90 के दशक में अपने प्री-टीन और टीन-एज में रहा कोई भी पाठक मेरी बात से पूरी तरह सहमत होगा- हमारी हर रेल-यात्रा में मंजिल से ज्यादा इंतज़ार… Read more »