Laugh and let laugh: The essential Ashok chakradhar

Ashok chakradhar in conversation with Satyanand Nirupam

Rajen kilachand Mughal tent

Presented by Dainik Jagran

आती है तो धुंआधार आती है

हंसी जब आती है

तो धुंआधार आती है

किसी के रोके नहीं रुक पाती है।

गाल गुलेल हो जाते हैं,

सारे ब्रेक फ़ेल हो जाते हैं।

ये हंसी

अपना शिकंजा

कुछ इस तरह कसती है,

कि मुंह-दांत भींच लो

तो तोंद हंसती है।

किसी भी पहचान को मोहताज़ नही और पचपन में बचपन का दिल रखने वाले अशोक चक्रधर मौज़ूद थे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन के पांचवे सत्र में। ना सिर्फ हँसने हँसाने के लिए बल्कि साझा करने के लिए अपने ज़िन्दगी की कुछ सुहानी यादें। हंसी के ऊपर अपनी पी.एच.डी. करने वाले अशोक चक्रधर ने हँसी की भाषा से लेकर व्याकरण, संधि, समास तक सब कुछ सामने रख दिया। और दर्शकों को इतना गुदगुदाने के बाद आखिर में कहा कि हँसी सिर्फ होठ में नहीं आती ये आती है तो पूरे अस्तित्व में आती है।

गजानन माधव मुक्तिबोध को आदर्श मानने वाले अशोक चक्रधर ने चुटकी लेते हुए राग दरबारी की पंक्तियों श्रोताओं के सामने रखी। ‘उसकी बांछे खिल गई पर बांछ शरीर में कँहा होती है हमे नही जानते। श्री चक्रधर ने बहुत छोटी सी उम्र में अपनी हास्य कविता के प्रेम को दर्शाते हुए श्रोताओं से हास्य के प्रति प्रेम को साझा किया। दादी, माँ यहाँ तक बगल वाले चाचा से प्रभावित हुई उनकी लेखनी को बताते हुए श्री चक्रधर ने तमाम मनोरंजक किस्से सुनाए।

हिंदी की लोकप्रियता और वैश्विक पटल पर हिंदी के प्रचार प्रसार पर हुए सवाल पर श्री चक्रधर ने सीधे जवाब देते हुए कहा कि हिंदी तथा भारत की अन्य भाषाओं को अंग्रेजी से कोई भी खतरा नहीं है। सुंदर पिचाई से 2 साल पहले हुई बातचीत का हवाला देते हुए श्री चक्रधर ने कहा कि आने वाले सालों में हिंदी सहित भारत की अन्य भाषाओं से इंटरनेट का 46 प्रतिशत हिस्सा भरा होगा। तथा विश्व की चार बड़ी भाषाओं में एक हिंदी होगी।

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