श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान

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प्रायोजक: दैनिक भास्कर

 

वृषाली जैन, अधिकृत ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

 

साल 2016 से जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में एक नयी रीत चली थी| रीत, युवा और उभरते लेखकों के सम्मान की| रीत उन्हें वो प्रोत्साहन देने की, जो लेखन जगत में कम ही मिलता है| श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान ऐसे ही युवा, समर्पित और प्रतिभावान लेखकों के लिए है जिन्होंने अपनी लेखनी से लेखन जगत को एक नयी दिशा दिखाई है|

साल 2017 का श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल सम्मान युवा कवि-लेखक यतीन्द्र मिश्र को उनकी किताब लता सुर-गाथा के लिए दिया गया है| वाणी प्रकाशन से छपी लता सुर-गाथा सुप्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर के जीवन को, उनके सात दशक के सुनहरे बॉलीवुड के सफ़र को बड़ी खूबसूरती से शब्दों में पिरोई गयी एक माला है|

लेखक का परिचय कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय बोले, “ये किताब यतीन्द्र के दस साल की मेहनत का नतीजा है| कुल जमा सात साल में 200 घंटों लम्बे लता जी के इंटरव्यू को क्रम-बद्ध करने अनूठी कहानी है ये|”

अनंत विजय ने कहा कि इस किताब के साथ यतीन्द्र ने पूरी ईमानदारी बरती है| उन्होंने उन कोनो को भी खंगाला है जिन्हें अमूमन हिंदी के लेखक झांककर भी नहीं देखना चाहते| ऐसे दौर में जब इतिहासकार वीर सावरकर का नाम नहीं लेना चाहते, लता जी के जीवन से जुड़े वीर सावरकर वाले प्रसंग को यतीन्द्र ने पूरी इमानदारी से, बिना सम्पादित किये हुए लिखा है|

खुद यतीन्द्र का कहना था, “मुझे पुरस्कार तो उसी दिन मिल गया था, जिस दिन  लता दीदी ने किताब के लिए हाँ भरी| इस दस में दोस्तों ने, मिलने वालों ने यहाँ तक की मेरे प्रकाशक अरुण महेश्वरी ने भी बार-बार पूछा किताब कब ख़त्म हो रही है, किताब कब ख़त्म हो रही है… मैं बस यही कह पाटा था हो रही है| और अब हुई है तो आपके सामने है|”

यतीन्द्र ने बताया कि किस मासूमियत से लता जी उनसे आजकल चल रहे मेक-अप के सामान के बारे में पूछा करती थीं| “इस किताब में मैंने इसका ज़िक्र भी किया है| लता दीदी हमेशा पूछती थीं कि इतने सारे प्रसाधन इतने छोटे से मूंह पर लगा कैसे लेती हैं अब लड़कियां?” यतीन्द्र ने मुस्कुराते हुए कहा|

सत्तर साल के लम्बे वक्त में जिंदगी ने बहुत सरे फलसफे दिए लता जी को| इन्हीं फलसफों में से एक को यतीन्द्र जी कुछ यूं बताते हैं, “एक रोज़ मैं लता दीदी को फ़ोन करने में दस मिनट लेट हो गया| कुछ ढाई घंटे की बात के बाद दीदी बोलीं, ‘बेटा एक गाने की उम्र तीन मिनट की होती है, दस मिनट का मतलब मेरे तीन गानों की उम्र है| और मैं वो हूँ जो मेरे गानों ने मुंझे बनाया|’ ”

यतीन्द्र मिश्र को पुरस्कार प्रेषित करने के लिए दैनिक भास्कर, राजस्थान के संपादक लक्ष्मी प्रसाद पन्त और  दैनिक भास्कर बिज़नस हेड, जयपुर, जी एस शेखावत उपस्थित थे|

इस मौके पर वाणी फाउंडेशन के चेयरमैन अरुण महेश्वरी और वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति महेश्वरी गोयल भी मौजूद रहे|

 

Photo Credit: Rajendra Kapoor

 

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