वाणी फाउंडेशन गणमान्य अनुवादक पुरस्कार

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प्रायोजक: वाणी फाउंडेशन एवं टीमवर्क आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड

वृषाली जैन, अधिकृत ज़ी लिटरेचर फेस्टिवल ब्लॉगर

किसी भी भाषा के साहित्य की पहुँच सीमित होती है क्योंकि उस भाषा को पढने-लिखने वाले लोगों का दायरा सिमित होता है| साहित्य के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है कि उसे न ही केवल मूल भाषा में पढ़ा जाना चाहिए बल्कि उसका दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद होना चाहिए ताकि वो ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँच सके|

इस साल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का जोर अनुवादकों की भूमिका पर है| इसी कर्म में वाणी प्रकाशन और टीमवर्क आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डॉक्टर अनामिका को वाणी फाउंडेशन गणमान्य अनुवादक पुरस्कार से सम्मानित किया गया| वाणी फाउंडेशन गणमान्य अनुवादक पुरस्कार ऐसे अनुवादकों को सम्मानित करता है जो 2 या दो से अधिक भाषाओँ के साहित्य के बीच की एक मत्वपूर्ण कड़ी बनते हैं|

डॉ. अनामिका एक प्रख्यात अनुवादक, कवयित्री, लेखिका और आलोचक हैं|

डॉ. अनामिका के आठ कविता संग्रह, पाँच कहानियाँ और कई आलोचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं| स्त्रीवादी विचारधारा से युक्त इनका स्वर और रचनाएँ अंग्रेज़ी और हिन्दी के नवोदित लेखकों और पीढ़ी दर पीढ़ी पाठकों को प्रेरित करती है|

डॉ. अनामिका को ये सम्मान वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और हिंदुस्तान अखबार की पूर्व संपादक मृणाल पांडे ने दिया| डॉ. अनामिका के बारे में मृणाल जी का कहना था, “मैं अनामिका को तबसे देखती आ रही हूँ जबसे वो एक युवा कवियत्री थी| मैंने एक सम्पादक के तौर पर इनकी कई रचनाएँ देखी हैं| ये मेरे लिए भी एक गर्व का दिन है|”

नीता गुप्ता, निदेशक, जयपुर बुक मार्क, ने कहा, “जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल वाणी प्रकाशन और टीम वर्क का शुक्रगुजार है कि उन्होंने ऐसी पहल की| अनुवादकों का सम्मान प्रकाशन जगत के लिए बहुत ज़रूरी है|”

मौके पर वाणी प्रकाशन के संस्थापक अरुण महेश्वरी ने अनामिका जी को बढाई दी हुए कहा कि अनुवाद के जगत में उनका अतुलनीय योगदान रहा है| वो पुरस्कार के सम्मानित निर्णायक मण्डल में नमिता गोखले, संस्थापक और सह-निदेशक, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल; नीता गुप्ता, निदेशक, जयपुर बुक मार्क और संदीप भुटोरिया, सांस्कृतिक आलोचक के शुक्रगुजार हैं|

कार्यक्रम के अंत में अपनी बात रखते हुए डॉ. अनामिका ने सभी का शुक्रिया ऐडा करते हुए कहा कि जब किसी को कुछ बिन मांगे, बिना उम्मीद कुछ मिल जाता है तो उसकी ख़ुशी लफ़्ज़ों में बयान नहीं हो सकती| वो हमेशा कोशिश करेंगी कि वो इस भरोसे को संभाल के रख सकें|

ये पुरस्कार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के औद्योगिक भाग, जयपुर बुक मार्क का हिस्सा था|

कार्यक्रम का संचालन वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति महेश्वरी गोयल ने किया|

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